<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?><!-- generator=Zoho Sites --><rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"><channel><atom:link href="https://testsstore1.zohoecommerce.in/blogs/tag/navratri-2020/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><title>Test store 1 - &lt;script&gt;alert('XSS');&lt;/script&gt; ##navratri 2020</title><description>Test store 1 - &lt;script&gt;alert('XSS');&lt;/script&gt; ##navratri 2020</description><link>https://testsstore1.zohoecommerce.in/blogs/tag/navratri-2020</link><lastBuildDate>Sat, 23 May 2026 01:03:05 +0530</lastBuildDate><generator>http://zoho.com/sites/</generator><item><title><![CDATA[नवरात्र में माँ के स्वरूप के कुछ पूजा एवं नियम]]></title><link>https://testsstore1.zohoecommerce.in/blogs/post/some-rules-and-regulations-of-worshipping-various-incarnations-of-goddess-during-navratri-2020</link><description><![CDATA[मां दुर्गा की आराधना को समर्पित नवरात्रि के पहले दिन कलश या घट स्थापना से व्रत का प्रारंभ होता है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प ]]></description><content:encoded><![CDATA[
<div class="zpcontent-container blogpost-container "><div data-element-id="elm_rGPTdE7rSk2Z5aw3b--Kdw" data-element-type="section" class="zpsection "><style type="text/css"></style><div class="zpcontainer"><div data-element-id="elm_fe6xYMg3QhuogNAMcUyHwA" data-element-type="row" class="zprow zpalign-items- zpjustify-content- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_9knBkjGzTBeN70fTayttqw" data-element-type="column" class="zpelem-col zpcol-12 zpcol-md-12 zpcol-sm-12 zpalign-self- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_oXpXoZfXQvSO9D0svHFxKA" data-element-type="text" class="zpelement zpelem-text "><style></style><div class="zptext zptext-align-center " data-editor="true"><div>मां दुर्गा की आराधना को समर्पित नवरात्रि के पहले दिन कलश या घट स्थापना से व्रत का प्रारंभ होता है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है। नवरात्र के 10 दिन प्रात: और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न करना चाहिए। नवरात्र में हवन और कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार हवन और कन्या पूजन के बिना नवरात्र की पूजा अधूरी मानी जाती है। साथ ही नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करना चाहिए। नवरात्र में <strong>&quot;श्री दुर्गा सप्तशती&quot;</strong> का पाठ करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माता दुर्गा नौ दिनों के लिए पृथ्वी लोक में वास करती हैं, इसलिए शारदीय नवरात्रि का महत्व बढ़ जाता है। इन दिनों में यदि विधि विधान से माता की आराधना की जाए, तो वह प्रसन्न होंगी और सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगी। नवरात्रि में माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा देवी, कुष्मांडा देवी, स्कंदमाता, माता कात्यायनी, मां कालरात्रि , महागौरी और माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यदि आपने नवरात्रि का व्रत रखने का निर्णय लिया है तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपको नवरात्रि की पूजा में किन-किन वस्तुओं का इस्तेमाल करना है। 1. माता दुर्गा की नई मूर्ति या तस्वीर - यदि पूजा घर में दुर्गा माता की पुरानी तस्वीर या मूर्ति है, तो उसे हटाकर नई तस्वीर स्थापित करनी होगी। यदि माता की मूर्ति मिट्टी की है, तो बहुत अच्छा रहेगा। 2. माता के लिए नई लाल चुनरी - माता की तस्वीर पर चढ़ाने के लिए नई लाल चुनरी लें। मूर्ति रखी है तो उनके वस्त्रों के साथ लाल चुनरी लें। 3. चौकी - माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करने के लिए एक चौकी। उस पर बिछाने के लिए पीला वस्त्र। 4. नया कलश- घट या कलश स्थापना के लिए एक कलश। कलश में रखने के लिए आम की हरी पत्तियां। 5. माता की आराधना के लिए दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती की पुस्तक। 6. माता को अर्पित करने के लिए लाल सिंदूर और लाल पुष्प- विशेषकर गुड़हल का फूल। 7. कलश पर रखने के लिए मिट्टी के पात्र, जिसमें जौ के बीज रखे जाएंगे। 8. अक्षत् के लिए चावल, गंगा जल, चंदन, रोली, शहद और कलावा या मौली। 9. नारियल, गाय का घी, सुपारी, लौंग, इलायची। 10. पान का पत्ता, धूप, अगरबत्ती, कपूर। 11. बैठक कर पूजा करने के लिए एक उपयुक्त आसन। हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में, व्रत, त्योहार की तिथि नियम जैसे किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु अथवा रेकी, नुमेरोलॉजी, हीलिंग, रुद्राक्ष, क्रिस्टल, कुंडली, वास्तु, हस्त रेखा, विवाह, घर, धन में कमी, प्रमोशन, नौकरी इत्यादि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो आप हमें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर सकते हैं 9152203064</div></div>
</div></div></div></div></div></div> ]]></content:encoded><pubDate>Thu, 15 Oct 2020 12:10:23 +0000</pubDate></item><item><title><![CDATA[कब से है शारदीय नवरात्रि 2020? जानिए घटस्थापना मुहूर्त]]></title><link>https://testsstore1.zohoecommerce.in/blogs/post/when-is-shardiya-navratri-2020-and-what-is-its-ghatsthapna-mahurat</link><description><![CDATA[नवरात्रि त्योहार का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. ये त्योहार देश के कोने-कोने में मनाया जाता है. चार प्रकार के मौसमी नवरात्र होते हैं, लेकिन जो सितंबर ]]></description><content:encoded><![CDATA[
<div class="zpcontent-container blogpost-container "><div data-element-id="elm_3vVfX4VRSDq315S2x7JZdw" data-element-type="section" class="zpsection "><style type="text/css"></style><div class="zpcontainer"><div data-element-id="elm_1aAkqMQmTYWcHRsLC_sI0A" data-element-type="row" class="zprow zpalign-items- zpjustify-content- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_XhjSbEf9TVCvNmI19YJoWg" data-element-type="column" class="zpelem-col zpcol-12 zpcol-md-12 zpcol-sm-12 zpalign-self- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_QYzBsw9lTyiccTvuRHQ7ow" data-element-type="text" class="zpelement zpelem-text "><style></style><div class="zptext zptext-align-center " data-editor="true"><div><p style="margin-top:5pt;margin-bottom:5pt;font-family:&quot;Nirmala UI&quot;;font-size:12pt;color:rgb(25, 30, 35);">नवरात्रि त्योहार का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. ये त्योहार देश के कोने-कोने में मनाया जाता है. चार प्रकार के मौसमी नवरात्र होते हैं, लेकिन जो सितंबर-अक्टूबर के महीनों में पड़ती है उसे शरद या शारदीय नवरात्रि कहा जाता है और यह सबसे ज्यादा मनाया जाने वाला त्योहार है. हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार यह नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन शुक्‍ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं. इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टोबर से शुरू होकर 24 अक्‍टूबर, 2020 तक हैं. 25 अक्‍टूबर, 2020 को विजयदशमी या दशहरा (विजयदशमी ओर दशहरा) मनाया जाएगा.</p><p style="margin-top:5pt;margin-bottom:5pt;font-family:&quot;Nirmala UI&quot;;font-size:12pt;color:rgb(25, 30, 35);"><strong>कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त</strong> नवरात्रि 17 अक्टोबर से शुरू होगी और इसी दिन कलश की स्थापना की जाएगी. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश की स्थापना हमेशा उचित मुहूर्त में ही करनी चाहिए. इस बार नवरात्रि पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रात: 6 बजकर 23 मिनट से प्रात: 10 बजकर 12 मिनट तक है। घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त प्रात:काल 11:44 से 12:29 तक रहेगा।</p><p style="margin-top:5pt;margin-bottom:5pt;font-family:&quot;Nirmala UI&quot;;font-size:12pt;color:rgb(25, 30, 35);"><strong>कलश स्थापना से जुड़े खास नियम</strong> -कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करें. -कलश स्थापना करने के लिए पूजन स्थल से अलग एक पाटे पर लाल व सफेद कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित करें. -कलश का मुंह खुला ना रखें, उसे किसी चीज से ढक देना चाहिए. कलश को किसी ढक्कन से ढका है, तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें. -पूजा करने के बाद मां को दोनों समय भोग लगाएं, सबसे सरल और उत्तम भोग हैं लौंग और बताशा. -मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है, पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल ना चढ़ाएं. -नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिन तक अपना खान-पान और आहार सात्विक रखें.</p><p lang="en-IN" style="margin:0in;font-family:Calibri;font-size:11pt;">हमारे facebook लिंक https://www.facebook.com/JayMahakal01/ को like और share करें twitter और instagram पर फॉलो करे हमारा handle है @jaymahakaal01 और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए www.jaymahakaal.com आप हमसे मेल के माध्यम से संपर्क कर सकते है हमारी EMail id है askus@jaymahakaal.com. साथ ही आप हमें संपर्क भी कर सकते हैं&nbsp; &nbsp; +91 - 9152203064&nbsp; पर</p></div></div>
</div></div></div></div></div></div> ]]></content:encoded><pubDate>Wed, 14 Oct 2020 10:46:33 +0000</pubDate></item></channel></rss>